धागा मिलो में कामगार महिलाओं का सामाजिक-सांस्कृतिक स्तर एवं स्व-उद्यमिता के प्रति रूझान का अध्ययन

 

कीर्ति वर्मा1, निर्मला सिंह2

1गृह विज्ञान विभाग, ज्वाला देवी विद्या मंदिर, पी0जी0 कॉलेज, कानपुर, उत्तर प्रदेश, भारत

2प्रोफेसर, ज्वाला देवी विद्या मंदिर, पी0जी0 कॉलेज, कानपुर, उत्तर प्रदेश, भारत

*Corresponding Author E-mail:

 

ABSTRACT:

धागा मिलो मे कामगार महिलाओं का जो इन कारखानों में धागों की रीलिंग, छटाई, बटाई, रँगाई तथा स्पिनिंग मशीनों के रख-रखाव से संबंधित कार्यों में संलग्न प्रतिचयन रहकर अपने परिवारों के जीवन-यापन में सहयोग देती है। उनके सामाजिक-सांस्कृतिक स्तर का उनके मनोवैज्ञानिक व्यवहार एवं आत्मविश्वास पर गहरा प्रभाव देखा जाता है। साथ ही निर्णय लेने कि क्षमता भी विकसित होने लगती है, फिर थोड़े ही प्रोत्साहन से उनको स्व-उद्यमिता के लिए प्रेरित किया जा सकता है। इन्हीं सह-संबंधों कि शृंखला में वर्तमान शोध में धागा कारखानों में कार्यरत महिलाओं पर इन उद्देश्यों के अंतर्गत अध्ययन कार्य किया गया। यहाँ कि कामगार महिलाओं का सामाजिक एवं सांस्कृतिक परिवेश का अध्ययन; इन महिलाओं का स्व-उद्यमिता के प्रति रुझान का आकलन करना। इस प्रकार उनमें आत्मविश्वास का अध्ययन किया गया। इसके लिए कानपुर क्षेत्र के धागा मिलो से क्लस्टर न्यादर्श प्रतिचयन विधि  द्वारा 100 महिलाओं का चयन किया गया। सर्वेक्षण  विधि में प्रमाणित प्रश्नावली का प्रयोग किया गया। स्कोरिग विधि से सभी पहलुओं  के प्रदर्शन स्तर  ज्ञात  किया गया। सांख्यिकीय विधियों में प्रतिशत, माध्य या औसत, टी-परीक्षण  मान आदि का प्रयोग आँकड़ों के विश्लेषण में हुआ। जिसमें परिणाम निकला कि मात्र 7 प्रतिशत महिलाओं का उद्यमिता के लिए सशक्त पायी गयी। महिलाओं का सामाजिक एवं सांस्कृतिक स्तर निम्न से सामान्य रहा। जन-सांख्यिकीय अध्ययन में अल्प शिक्षा तथा निम्न सामाजिक- सांस्कृतिक स्तर इन कामगार महिलाओं के आत्मविश्वास को कमजोर बना कर उनमें स्वयं के व्यवसाय के प्रति रुझान को खत्म कर रहा है। अतः पर्याप्त प्रेरणा व प्रशिक्षण से इस दिशा में उनको सशक्त बनाने की आवश्यकता है।

 

KEYWORDS: उद्यमिता, माध्यम, उद्योग, आत्मविश्वास, क्लस्टर, स्कोरिग विधि, सामाजिक एवं सांस्कृतिक परिवेश, कामगार।

 

 


INTRODUCTION:

धागा मिलो की महिला श्रमिको में ज्यादातर को यहाँ कार्य करने में आसानी रहती ही क्यांेकि इन कार्यों के लिए कोई विशेष कौशल या शैक्षणिक योग्यताओं की आवश्यकता नहीं लगती है और वो अपने परिवार के जीवन-यापन के लिए कमाई कर सकती है। इन मिल्स में महिला श्रमिको की ज्यादा माँग है, जिनको थोड़े से ही प्रशिक्षण से ही धागा निर्माण के कार्य से सम्बंधित कार्यों में लगा लिया जाता है। इस प्रकार श्रमिक के रूप में अपना प्रतिभाग देते हुए उन्हें पारिवारिक एवं सामाजिक सहयोग की जरुरत होती है, वही सांस्कृतिक परिवेश भी उनके आत्मविश्वास की लिए बहोत महत्वपूर्ण होते है- टॉम फिलिप्स, (2018)। सामाजिक-सांस्कृतिक परिवेश में परिवारिक, आस-पड़ोस तथा कार्यक्षेत्र कि स्थितियाँ एवं सहयोग शामिल होते है। यहाँ क्रमशः पारिवारिक सदस्यों, पड़ोसियों तथा सहयोगियों का व्यवहार एवं पारस्परिक सम्बंध ही लोगों का सामाजिक स्तर निर्धारित करते है। जबकि, सांस्कृतिक परिवेश के अंतर्गत उनकी विभिन्न परिपेक्ष्यो में जागरूकता, अभिवृतियाँ, धार्मिक रीति-रिवाजों में भागीदारी, सामूहिक सामुदायिक परम्पराओं और पारम्परिक कलाओ तथा कारीगरी को विकसित करना ही उनके सांस्कृतिक मूल्यों व स्तर को तय करती है। एम0आई0 सिद्दीकी (2004) के अनुसार कपड़ा एवं धागा उद्योगों में महिला श्रमिक कम आय में भी ज्यादा श्रम एवं समय देती है इसलिए इनके लिए यहाँ बहुत अवसर मिलते है, और इन्हें गरीबी में घर-गृहस्थी चलाने की मजबूरी होती है, फिर ये श्रमिक चक्र चलता जाता है, फिर उनका जीवन स्तर निम्न रह जाता है। भारत देश में विभिन्न सामाजिक सांस्कृतिक परिवेश में जातीय व्यवस्था भी शामिल है, उसके अनुसार एक सामाजिक-सांस्कृतिक तनाव भी इन श्रमिको के बीच व्याप्त हो जाता है-घनश्याम कुशवाहा, (2021)। परन्तु, इन परिपेक्ष्यो की ओर से सशक्त महिला श्रमिको में एक मजबूत मानसिक स्थिति उनको लगातार आर्थिक विकास के लिए प्रेरित करती है-पी0 जयलक्ष्मी, (2016)।

 

धागा निर्माण से सम्बंधित सभी कार्यो तथा मशीनों या उपकरणों के व्यवस्थापन एवं रख-रखाव का पर्याप्त अनुभव यहाँ कार्यरत महिला श्रमिको को हो जाता है, साथ ही सरकारों द्वारा आर्थिक सहायता से संबंधित विभिन्न योजनाये है। इस प्रकार ये महिलाये स्वयं के धागा उद्योग की स्थापना के आर्थिक स्थिति तथा जीवन स्तर बेहतर बना सकती है। इसी संदर्भ से प्रस्तुत शोध अध्यन में धागा मिलो की महिला श्रमिको सामाजिक-सांस्कृतिक स्तर का परीक्षण कर उनका स्व-उद्योग स्थापन के लिए रुझान का स्तर ज्ञात किया गया।

 

शोध-प्राविधि:

एक्स्प्लोरेट्री रिसर्च डिजाइन द्वारा वर्तमान शोध अध्यन में आँकड़ो का संकलन किया गया। कानपुर क्षेत्र के धागा मिलों से महिला कामगारों का कलस्टर प्रतिचयन विधि से 100 प्रतिदर्शो का चयन किया गया। उत्तरदाता बनने के लिए उनकी सहमति ही चयन का मापदंड निर्धारित की गई थी।

 

शोध उपकरण एवं विधियाँ-

Baerra एवं  Weber (1986), द्वारा प्रतिपादित सामाजिक- सांस्कृतिक स्तर के 13 प्रश्नों वाले विश्वसनीय मापन स्केल का वर्तमान अध्ययन में उपयोग किया गया, आवश्यकतानुसार उचित प्रश्नों को लेकर तैयार प्रश्नावली की सहायता से मिल्स में कामगार महिलाओं का सामाजिक-सांस्कृतिक स्तर का आकलन सर्वेक्षण विधि से किया गया। इसके लिए उनके कार्यक्षेत्र में जाकर इंटरव्यू द्वारा उत्तर लिए गए। जन सांख्यिकीय प्रश्नावली के साथ संरचित एवं विषय विशेषज्ञों से प्रमाणित प्रश्नावली से उनके स्व-व्यवसाय के प्रति रुझान के स्तर का आकलन किया गया।

 

आँकड़ो का विश्लेषण:

प्रश्नों के उत्तरो पर निर्धारित अंकों के स्कोरो कि गणना कर न्यादर्शों के प्रदर्शन को ज्ञात किया गया, जिसमें कुल प्राप्त स्कोर पर निर्धारित श्रेणी से स्तर का आंकलन हुआ। सांख्यकीय विधियों में प्रतिशत, माध्य, टी-परीक्षण एवं सह-सम्बन्ध ज्ञात कर आँकड़ो का विश्लेषण कर परिणाम प्राप्त किये गए।

 

परिणाम:

धागा मिलों की महिला श्रमिकों पर किये अध्यन से निम्नलिखित परिणाम प्राप्त हुए-

1. जनसांख्यिकीय अध्यन के परिणाम-

1.1 आयु वर्ग के अनुसर प्रतिदर्शो का वर्गीकरण:

सारणी संख्या 1 के प्रदर्शित जानकारी के आधार पर ज्ञात हुआ कि सबसे ज्यादा (61 प्रतिशत) महिला उत्तरदाता 16-26 वर्ष आयु की श्रेणी में रहे। 27 प्रतिशत 26-36 वर्ष की तथा सबसे कम (12 प्रतिशत) 36-46 वर्ष में रही। टी-परीक्षण से प्राप्त वैल्यू में प्रदर्शित करती है कि आयु वर्ग एवं महिलाओं के प्रतिशत के बीच सांख्यिकीय तौर पर सार्थक सह-सम्बन्ध रहा और कम आयु वर्ग में ज्यादा महिला श्रमिक मिल्स में कार्यरत थीं।

 

सारणी संख्या 1- धागा मिलों की महिला कामगारों का आयु वर्ग

आयु वर्ग (वर्ष)

प्रतिशत

X2 वैल्यू

16-26

61

0.726

26-36

27

36-46

12

सांख्यिकीय रूप में 0.01 प्रतिशत स्तर पर सार्थकता

 

1.2 शिक्षा का स्तर:

सारणी संख्या 2 के अनुसार अधिकतम (73 प्रतिशत) प्राइमरी, 27 प्रतिशत हाईस्कूल तक की शिक्षित पाई गई, मात्र 2 प्रतिशत महिलाओं ने बी0ए0 तक शिक्षा प्राप्त की थी। जबकि 7 प्रतिशत अशिक्षित वर्ग में रही।

 

सारणी संख्या 2: न्यादर्श महिलाओं की शिक्षा स्तर

शैक्षणिक योग्यता

प्रतिशत

अशिक्षित

7

प्राइमरी

73

हाईस्कूल

27

उच्च शिक्षित

2

 

2. सामाजिक परिवेश का स्तर:

2.1 कार्य क्षेत्र का सामाजिक परिवेश: सारणी संख्या 3 में देखा जा सकता है कि धागा मिलों की 76 प्रतिशत महिलाओं का उनके सहकर्मियो के साथ सामान्य श्रेणी का सहयोग एवं व्यहार देखा गया, जबकि 24 प्रतिशत के उत्तम श्रेणी के रहे लेकिन किसी का भी निम्न नही प्राप्त हुआ, अर्थात परस्पर बुरा बर्ताव नही मिला। इस परिप्रेक्ष्य में उनके द्वारा प्राप्त स्कोरों का माध्य 1.3 प्राप्त हुआ।

 

कारखाने के उच्च अधिकारियों का कामगार महिलाओं के साथ व्यावसायिक व्यवहार मात्र 10 प्रतिशत लोगों को उत्तम श्रेणी का प्राप्त होता है, 55 प्रतिशत महिलाओं का सामान्य तथा 35 प्रतिशत का असंतोषजनक रहा। इस परिपेक्ष्य में स्कोरों का औसत या माध्य 0.75 प्राप्त हुआ।

 

इन श्रमिक महिलाओं का उनके कार्य क्षेत्र में आवश्यक सम्मानजनक स्थिति 66 प्रतिशत में नही प्राप्त हो रही थी। जबकि 34 प्रतिशत महिलाओं को सामान्य रूप सेसम्मान मिल रहा था, तथा कोई भी महिला श्रमिक को अपमानजनक स्थिति का सामना नही करना पड़ा। लगभग 56 प्रतिशत महिला कामगारों को धागा मिलों के सामाजिक उत्सवों या त्यौहारों आदि में बोनस अथवा उपहार मिल रहे थे, लेकिन 44 प्रतिशत को नही प्रप्त हो रहे थे, स्कोरो का माध्य कार्य क्षेत्र में साफ-सफाई, आरोग्यता तथा शौचालयों की स्थिति 20 प्रतिशत न्यादर्शो के मिलों में उत्तम, 56 प्रतिशत में सामान्य तथा 21 प्रतिशत में अच्छी नही पाई गई एवं सकोरों के औसत 1.0 प्राप्त हुआ।


सभी परिप्रेक्ष्यों में न्यादर्शो द्वारा प्राप्त का कुल स्कोरों का माध्य 0.57 प्राप्त हुआ। श्रेणी में कार्यक्षेत्र में उनका सामाजिक स्तर सामान्य से कम अर्थात् निम्न श्रेणी का प्राप्त हुआ।

 

सारणी संख्या 3: धागा उद्योग की महिला कामगारों के कार्यक्षेत्र में उनकी सामाजिक स्थिति

धागा मिलों की महिला श्रमिकों के कार्यक्षेत्र में विभिन्न परिप्रेक्ष्यों में सामाजिक परिवेश

न्यादर्शों के कार्यक्षेत्र के सामाजिक परिवेश का स्तर (प्रतिशत में)

निम्न स्तर

सामान्य स्तर

उत्तम स्तर

स्कोरो का माध्य

कारखानों में सहकर्मियों के साथ सहयोग की स्थिति

0.0%

70.0%

30. %

1.3

उच्च अधिकारियों से व्यवसायिक व्यवहार की स्थिति

35%

55.%

10.%

0.75

कारखाने में महिला कामगारों के सम्मान की स्थिति

66.0%

34.0%

0.0%

0.34

सामाजिक उत्सवों या त्यौहारों में मिल के कामगारों के सम्मान की स्थिति

44.0%

56.0%

00.0%

0.5

धागा मिलों में सफाई आरोग्यता तथा शौचालय की स्थिति

44.0%

56.%

0.0%

1.0%

सभी परिप्रेक्ष्यों के स्कोरों के माध्यमान

0.57

 

2.2 आस-पड़ोस की सामाजिक स्थिति(विभिन्न निर्धारित परिप्रेक्ष्यों से):

महिला कामगारों के घरों की आस-पास के समुदाय में आपसी व्यावहार को सारणी संख्या 4 में प्रदर्शित किया है। इसके अनुसार आस-पड़ोस के सामाजिक स्तर के प्रथम परिप्रेक्ष्यों में महिला न्यादर्शो द्वारा प्राप्त स्कोरों का माध्य 1.75 प्राप्त हुआ। इसमें ज्यादातर (53 प्रतिशत) महिला श्रमिकों ने सामान्य स्थिति अनुभव किया जबकि 47 प्रतिशत को उत्तम श्रेणी का सामाजिक व्यवहार आस-पास से प्राप्त हो रहा था।

 

पड़ोसियों से सहयोग की स्थिति में 8 प्रतिशत न्यादर्शों ने निम्न स्तर का पाया। जबकि अधिकतम (59 प्रतिशत) प्रतिशत महिलाओं ने सामान्य स्तर एवं 33 प्रतिशत ने उत्तम श्रेणी का पाया। इस परिपेक्ष्य की स्कोरों का माध्य 1.25 रहा।

 

न्यादर्शी के बच्चों तथा पड़ोसियो के बच्चो के बीच मित्रता का व्यवहार सामान्य श्रेणी का 59 प्रतिशत में देखा गया। 36 प्रतिशत महिलाओं के बच्चों का उतम स्तर का देखा गया। मात्र 6 प्रतिशत में ही निम्न स्तर का रहा। सभी न्यादर्शों के प्राप्त स्कोरों का माध्य 1.5 रहा।

 

चतुर्थ परिपेक्ष्य में अधिकतम (46 प्रतिशत) महिलाओं के परिवारों का अपने घरों के आस-पास की दुकानों, राशन आपूर्ति केन्द्र एवं अन्य लोगों से सहयोग का व्यवहार का स्तर सामान्य पाया गया, 38 प्रतिशत में उत्तम श्रेणी का तथा 16 प्रतिशत निम्न स्तर का देखा गया। स्कोरों का 1.25 माध्य प्राप्त हुआ। पाँचवे परिपेक्ष्य में सबसे ज्यादा (73 प्रतिशत) निम्न स्तर, 19 प्रतिशत सामान्य तथा मात्र 8 प्रतिशत ही उच्च स्तर का रहा, 0/75 प्राप्त स्कोरों का औसत स्कोर रहा अर्थात ज्यादातर महिलाओं के घरों के आस-पास अस्वच्छ परिवेश देखा गया।

 

सारणी संख्या 4: महिला कामगारों की आस-पड़ोस में सामाजिक स्थिति का स्तर

श्रमिक महिलाओं की घरों के आस-पास समुदायों का से सामाजिक परिवेश

न्यादर्शों के घरों के आस-पास के सामाजिक परिवेश का स्तर (प्रतिशत में)

निम्न स्तर

सामान्य स्तर

उत्तम स्तर

स्कोरो का माध्य

आस पड़ोस के लोगों का सामुदायिक व्यवहार

0.0%

53%

47.0 %

1.75

पड़ोसियों से सहयोग के व्यवहार की स्थिति

7.0%

51. %

33.0%

1.25

महिला कामगारों, बच्चों के लिए पड़ोसियों के व्यवहार की स्थिति

6.0%

57.0%

360%

1.5

घर के आस-पास के दुकानदारों और राशन आपूर्ति कराने वालों से कामगार महिलाओं के व्यवहार की स्थिति

37.0%

46.0%

16.0%

0.5

घरों के आस-पास सफाई आरोग्यता की स्थिति

73.0%

19.0%

7.0%

0.75%

सभी परिप्रेक्ष्यों के स्कोरों के माध्यमान

1.3

 

2.3 पारिवारिक मूल्यों एवं स्थितियों का स्तर:

सारणी 5 में बताये गये परिप्रेक्ष्यों में प्रथम में ज्यादातर (49 प्रतिशत) का अपने पतियों से पारस्परिक सम्बन्ध सामान्य थे, इस प्रश्न में प्राप्त स्कोरों का माध्य 1.25 रहा। द्वितीय में अधिकतम (48 प्रतिशत) न्यादर्शों का अपने पारिवारिक सदस्यों के साथ भी सामान्य रहा और स्कोरों के औसत मान 0.75 प्राप्त हुआ। तीसरे परिपेक्ष्य में उनके बच्चों का पारस्परिक सम्बन्ध भी अधिकांशतः (48 प्रतिशत) में सामान्य पाया गया प्राप्त स्कोर का 0.75 माध्य ज्ञात हुआ। चौथे क्षेत्र में परिवार के बुजुर्गो से सहयोग व सम्मान के व्यवहार का स्तर 76 प्रतिशत प्रतिदर्शो में सामान्य और मात्र 7 प्रतिशत का उच्च स्तर रहा। इसमें उनके द्वारा अर्जित स्कोरों का मीन 1.0 प्राप्त हुआ। पारिवारिक कलह की स्थिति में 64 प्रतिशत न्यादर्शो में सामान्य जबकि 25 प्रतिशत का निम्न स्तर पाया गया, और इनके स्कोरों का माध्य 0.75 रहा।

 

सारणी संख्या 5: कामगार महिलाओं के पारिवारिक मूल्यों का स्तर

श्रमिक महिलाओं की घरों के आस-पास समुदायों का सामाजिक परिवेश

न्यादर्शों के घरों के आस-पास के सामाजिक परिवेश का स्तर (प्रतिशत में)

निम्न स्तर

सामान्य स्तर

उत्तम स्तर

स्कोरो का माध्य

परिवार में अपने पतियों से व्यवहार की स्थिति

23.0%

41.0%

27.0%

1.25%

पारिवारिक सदस्यों में आपसी सहयोग के व्यवहार की स्थिति

27.0%

47.0%

25.0%

0.75%

बच्चों का आपस में सम्बन्ध और व्यवहार की स्थिति

17.0%

47.0%

7.0%

0.75

घर के बुजुर्गों के सम्मान और उनके सहयोग की स्थिति

12.0%

76.0%

1.0%

1.0

घरों में पारिवारिक कलह की स्थिति

25.0%

64.0%

11.0%

0.75%

सभी परिप्रेक्ष्यों के स्कोरों के माध्यमान

0.12

 

3. स्व-उद्यमिता के प्रति धागा मिलों में कामगार महिलओं के रुझान का स्तर:

सारणी 6 के अनुसार 61 प्रतिशत महिलाओं ने अपने कौशल में दक्षता प्राप्त हो गई लेकिन केवल 18 प्रतिशत को ही इस क्षेत्र में स्व-उद्यम स्थापन से सम्बंधित विचार आते है। मात्र 7 प्रतिशत महिलायें स्वयं के अपना उद्योग स्थापित कर पाने को तैयार मानती हैं। इस तरह की मिलों के स्थापन में आवश्यक व्यवस्थाओं से सम्बंधित जानकारी पूर्णतः किसी को भी नही थी, मात्र 12 प्रतिशत को थोड़ा ज्ञात था। 11 प्रतिशत महिलायें अन्य क्षेत्रों में स्व-उद्यम स्थापित की इच्छुक पाई गयीं।

 

सारणी संख्या 6: महिला श्रमिकों का स्व-उद्यमिता के प्रतिरुझान का स्तर

श्रमिक महिलाओं में स्व-उद्यमिता के प्रति इच्छा शक्ति का स्तर

न्यादर्शों की प्रतिक्रिया का स्तर (प्रतिशत में)

नही

थोड़ा

हाँ

परिवार में अपने पतियों से व्यवहार की स्थिति

13.0%

26.0%

61.0%

पारिवारिक सदस्यों में आपसी सहयोग के व्यवहार की स्थिति

53.0%

29.0%

17.0%

बच्चों का आपस में सम्बन्ध और व्यवहार की स्थिति

57.0%

35.0%

7.0%

घर के बुजुर्गों के सम्मान और उनके सहयोग की स्थिति

77.0%

12.0%

0.0%

घरों में पारिवारिक कलह की स्थिति

69.0%

10.0%

11.0%

 

निष्कर्ष:

प्रस्तुत अध्यन में धागा मिलों की महिला मजदूरों एवं कर्मचारियों मे ज्यादातर (61 प्रतिशत) 17-27 वर्ष की 73 प्रतिशत मात्र प्राइमरी तक शिक्षित  महिलायें रहीं। इनका सामाजिक-सांस्कृतिक स्तर अधिकांश परिप्रेक्ष्यों में माध्यम श्रेणी का पाया गया। इसलिए इनमें स्व-उद्यम से सम्बंधित मनोबल एवं उत्साह की कमी देखी गयी। इसके लिए मात्र 7 प्रतिशत महिलायें ही पूर्णतः उत्साहित पायी गयीं, जिन्हें प्रोत्साहन एवं आर्थिक सहयोग की आवश्यकता थी। व्यक्ति को जब आदर्श पारिवारिक, आस-पड़ोस तथा कार्यक्षेत्र का परिवेश प्राप्त होता है तभी उसमें स्व-उद्यम जिस साहसिक कार्य का मनोबल विकसित होता है। क्योंकि मानसिक स्थिति पर ही निर्णय लेने की क्षमता आती है, और इस स्थिति को अनुकूल रखने के लिए सामाजिक-सांस्कृतिक प्रेरणा आवश्यक है। तभी इन महिलाओं में स्व-रोजगार के लिए उत्साह जागृत हो पाता है, अतः उनको मौलिक सहयोग और उद्यम व्यवस्थापन के उचित प्रशिक्षण के साथ तनाव उन्मूलन का भी प्रशिक्षण देना चाहिये एवं उनके लिए उचित सरकारी आर्थिक सहयोग के बारे में जागरूक करने की अत्यंत जरुरी है।

 

संदर्भ सूची:-

1.     Barrera M. (1986), Distinction between social support concepts, measures and models. Am. J. Comnun Psychol. 1986; 14(4): 413-45.

2.     Doubling Toms (1975), women work and protest in the early loyal thread mills, on line loaded 2007.

3.     कुशवाहा घनश्याम (2021), प्रवासी भारतीयों का सामाजिक-सांस्कृतिक संघर्ष; जर्नल अपनी माटी, जुलाई, 31, 2021, 35-36

4.     सिंह उपेन्द्र प्रसाद एवं रूचि कुमारी (2021), पावरलूम उद्योगों में कार्यरत मुस्लिम श्रमिको का एक समाजशास्त्रीय अध्यन (मऊ जिले के विशेष सन्दर्भ में) इंटरनेशनल जर्नल ऑफ़ एडवांसेज इन सोशल साइंसेज; वोल. 2021; 9(4): 183-190.

5.     Tom Phillips (2018), how can we improve conditions for women in south India’s cotton sectors: Thomson Reuters foundation news, Tuesday, 20 sep. 2018, 15:21GMT.

6.     Weber ML. (1998), She stands alone: a review of the recent literatures on women and social support Winnipeg: Prairie women’s health centre of excellence; 1998.

 

 

Received on 12.09.2025      Revised on 07.10.2025

Accepted on 30.10.2025      Published on 14.11.2025

Available online from November 25, 2025

Int. J. of Reviews and Res. in Social Sci. 2025; 13(4):232-236.

DOI: 10.52711/2454-2687.2025.00034

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